• Breaking News

    Friday, 24 March 2017

    Film Review: ये 'अनारकली' किसी से रहम नहीं मांगती!

    Film Review: ऐसी कहानियां कहने, उनपर पैसे लगाकर फ़िल्म बनाने का जोखिम उठाना बड़ी बात है लेकिन  इस फ़िल्म के ज़रिए निर्देशक अविनाश ने छोटे शहरों की कहानी को जिस तरह से दिखाया वो काबिले तारीफ़ है.
    फ़िल्म की कहानी बिहार के आरा ज़िले की नौटंकी और मेलों में नाचने वाली लड़की स्वरा भास्करा के इर्द गिर्द घूमती है जो एक दबंग वाइस चांसलर/ अधिकारी को सरेआम थप्पड़ मार देती है.
    ये फ़िल्म न सिर्फ़ छोटे शहरों में रहने वाले लोगों की कहानी को सीधे तौर पर दिखाती है, ये फ़िल्म दिखाती है कि कैसे दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों की सीमाओं से दूर आरा जैसी जगहों पर सिस्टम, नारीवाद और महिला सशक्तिकरण की आवाज़ें दम तोड़ देती हैं.
    और जब महिला अधिकारों की लड़ाई दिल्ली जैसे शहरों तक भी आ जाती हैं तो कैसे सत्ता के आगे दम तोड़ती है.
    एक नाचने वाली की इज्ज़त क्या इज्ज़त नहीं होती ? इस विषय को हिंदी सिनेमा में कई बार दिखाया गया है लेकिन इस विषय के इर्द गिर्द फ़िल्म बनाने की कोशिश पहली बार की गई है.
    और इस मामले में यह कहानी एक सच्ची घटना पर आधारित है जिसे पहले पत्रकार रहे निर्देशक अविनाश दास ढूंढ कर लाए हैं.
    अनारकली के किरदार में स्वरा खूब जमी है, वो न सिर्फ़ बिहार और आरा के मैनरिज़्म को अपनी चुकी हैं बल्कि वो एक स्मॉल टाउन गर्ल लगती भी हैं.
    भ्रष्ट राजनेता के किरदार में संजय मिश्रा जो करते हैं वो अच्छा करते हैं, वो कुटिल भी लगते हैं, हास्यास्पद भी और बाद में मजबूर भी.
    फ़िल्म अनारकली एक अच्छा मैसेज देने की कोशिश कर रही है कि कैसे एक महिला अगर अपने खिलाफ़ हो रहे ज़ुल्मों के विरोध में आवाज़ उठा ले तो फिर उसे दबाना असंभव हो जाता है.
    निर्देशक अविनाश दास खुद एक छोटे शहर से आते हैं और पत्रकार भी रह चुके हैं तो वो ऐसे में छोटे शहर के लोगों उनकी आदतों को फ़िल्म में दिखाने में सफल रहे हैं.
    बतौर निर्देशक ये उनकी पहली फ़िल्म है ऐसे में कुछ एक त्रुटियों  को पीछे छोड़ा जा सकता है, स्वरा अपने रोल में जमती हैं और वो जिस खुर्राट अंदाज़ में लोगों को दो टूक जवाब देती हैं वो मज़ेदार है.
    फ़िल्म के कॉमिक सीक्वेंस बेहद अच्छे बन पड़े हैं लेकिन एक नाचने गाने वाली की फ़िल्म होने के बावजूद संगीत थोड़ा कमज़ोर रह जाता है.
    इस फ़िल्म में स्वरा के अभिनय ने जान डाली है और जहां हाल ही में आई फ़िल्म पिंक ने शहर में रहने वाली महिलाओं की समस्याओं को उठाया था, अनारकली आपको सीधे भारत के अंदरुनी हिस्सों में ले चलती है जहां शराब के नशे में चूर मर्द अक्सर भूल जाते हैं कि कलाकार उनकी जायदाद नहीं होते.

    No comments:

    Post a Comment

    Fashion

    Beauty

    Travel